सर्दी में पाले से फसल की रक्षा करें किसान: डॉ दीपक कुमार मिश्र

हरदोई।कृषि विज्ञान केन्द्र हरदोई के वैज्ञानिक डॉ दीपक कुमार मिश्र के अनुसार, मौसम का मिजाज बराबर बदल रहा है और बर्फीली हवाओं के साथ पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय से सर्दी के साथ पाला भी पड़ने लगा है। ऐसे मौसम में किसान भाइयों को चाहिये कि फसलों का बेहतर प्रबंधन करें ताकि फसल की उत्पादकता पर अधिक प्रभाव न पड़ सके।
उन्होंने कहा कि जब सर्दी चरम पर होती है तो उस वक्त किसानों को अपनी फसलों की बचाने की चिंता होती है। उन्होंने कहा,कड़क सर्दी के कारण फसलों पर पाला पड़ने की आशंका बढ़ जाती है। जिसमें रबी की फसलों को काफी नुकसान पहुंचता है। उन्होंने कहा कि किसान अपनी आलू और अरहर, चना, सरसों, तोरिया, बागवानी फसलें, गेहूं,जौ आदि फसलों को बचाएं।
डॉ मिश्र ने बताया कि जब वायुमंडल का तापमान चार डिग्री सेल्सियस से कम तथा शून्य डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है तो पाला पड़ता है। इससे फसलों को बचाने के लिए 0.1 प्रतिशत गंधक का छिड़काव करें जिससे खेत का तापमान बढ़ जाता है और पाले से होने वाले नुकसान से फसल को बचाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त नर्सरी को पुआल से ढक कर रखें साथ ही खेतों में उत्तर पश्चिम दिशा में वायु रोधक टट्टियां लगाकर शीत लहर की वायु को रोका जा सके। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि जब पाला पड़ने की संभावना हो तो खेत में हल्की सिंचाई कर दें जिससे कि मिट्टी का तापमान बढ़ जाता है व पाले से फसल की सुरक्षा होती है। तापमान में लगातार गिरावट पाले का सबसे बड़ा संकेत होता है. क्योंकि तापमान में गिरावट आने के बाद पानी की संभावना अधिक बढ़ जाती है और तापमान में गिरावट के साथ अगर शीत लहर चल रही है तो यह पाला पड़ने का संकेत माना जाता है और इस पाले के कारण खेत में खड़ी किसान भाइयों की फसल पूरी तरह बर्बाद हो जाती है. इस पाले से सबसे अधिक नुकसान दलहन की फसलों के साथ-साथ सब्जियों की फसल और सरसों की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान होता है.ऐसे में किसान भाइयों को पाला पड़ने से पहले ही सतर्क रहना चाहिए, और उसका उपाय पहले ही कर लेना चाहिए ताकि उनकी खेत में खड़ी फसल बर्बाद न हो सके। ऐसे करें पाले से अपनी फसलों का बचाव
पाले से बचने के लिए खेतों में हल्की सिंचाई करना बहुत ही आवश्यक है। नमी युक्त जमीन है काफी देर तक गर्मी रहती है और भूमि का तापमान कम नहीं होता है।
अगर तापमान में लगातार गिरावट है तो रात के समय खेत के चारों तरफ धुंआ करना चाहिए ताकि धुंआ से वातावरण में गर्मी आ जाए।
एक एकड़ फसल के लिए 500 ग्राम सल्फर लेकर 200 लीटर पानी के साथ उसका घोल बनाकर फसल पर छिड़काव करने से पाले से फसल को बचाया जा सकता है।
एन पी के (घुलनशील उर्वरक) की एक किलोग्राम मात्रा लेकर 200 लीटर पानी में इसका घोल बनाकर इसका भी छिड़काव करना चाहिए.अब इससे भी पाले से फसल को बचाया जा सकता है।

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