आजादी की लड़ाई में पीछे नहीं रहे बिलग्रामी

आजादी का अमृत महोत्सव विशेष
स्वतंत्रता सेनानी श्री राधाकृष्ण अग्रवाल ने साइमन कमीशन के आते ही विदेशी मिल के कपड़े उतारे, खादी पहन किया अंग्रेज़ो का विरोध काटी जेल
कमरुल खान
बिलग्राम हरदोई।आज जिस देश में हम और आप रहते हैं खुली हवा में सांस लेते हैं। ये सब उन वीर सपूतों की देन है जिन्होंने मुल्क की आजादी के लिए अपना तन मन धन सब कुछ देश की खातिर लुटा दिया वो ही देश के सच्चे सिपाही थे उन में हिंदू भी थे ईसाई भी थे सिख भी थे पारसी और मुसलमान भी थे जिन्होंने दीन धर्म और नस्ल की बुनियाद पर लड़ाई नहीं लड़ी बल्कि देश की मिट्टी का कर्ज अदा करने के लिए कोई जेल गया किसी ने फांसी का फंदा चूमा किसी ने काले पानी की सजा पाई तब कहीं जाकर मुल्क के मांथे पर आजादी का सितारा चमक पाया। इस चमकते सितारे को पाने के लिए बिलग्रामियों ने भी कुर्बानी दी थी, देश में जहां कहीं भी बिलग्राम के बाशिंदे मौजूद थे अंग्रेज़ी हुकूमत के खिलाफ वहीं से जंग ए आजादी में कूद पड़े किसी ने अपनी जान गंवाई तो किसी ने जेल की सलाखों में चक्कियां पीसीं और किसी ने काले पानी की सजा पाई। ऐसा ही एक नाम बिलग्राम में जन्मे श्री राधाकृष्ण अग्रवाल का है। आपका जन्म 1 अक्टूबर 1907 को बिलग्राम में हुआ था आपने प्रारंभिक शिक्षा भी बिलग्राम में पाई जिसके बाद आप हरदोई चले गये जहां आपने हाई स्कूल की परिक्षा पास की और आगे की पढ़ाई के लिए आपने कानपुर का सफर तय किया।पढाई के दौरान ही जब सन 1928 में साइमन कमीशन भारत आया तो आपके अंदर भी देश भक्ति का जज्बा उमड़ पड़ा। आपने कमीशन के विरोध स्वरूप उसी दिन से विदेशी मिल के बने कपड़े उतार फेंके और खादी पहनना शुरु कर दिया।आपकी देश भक्ति को देखते हुए सन 1940 में आप को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी का सदस्य मनोनीत किया गया 3 दिसंबर 1940 को बिलग्राम में एक सार्वजनिक सभा में नारे लगा कर अंग्रेज़ी हुकूमत का विरोध करने वाले थे लेकिन अंग्रेज़ो ने उनकी इस मुहिम पर पानी फेर दिया अतः आपको हरदोई में ही गिरफ्तार कर लिया गया 4 दिसंबर 1940 को डी0आई0आर की धारा 21/38 के तहत एक वर्ष का कठोर कारावास और 800 सौ रुपये का जुर्माना लगा कर जेल में डाल दिया गया 15 जनवरी 1941 को हरदोई जेल से आपको बनारस की सेंट्रल जेल शिफ्ट कर दिया गया जहां से आपको एक अक्टूबर 1941 को रिहा कर किया गया जेल से बाहर आते ही फिर आप अंग्रेज़ भारत छोड़ो आंदोलन में लग गए 9 अगस्त 1942 को दोबारा आपको गिरफ्तार कर अनिश्चितकालीन के लिए नजर बंद कर दिया गया कुछ साल के बाद  भारत आजाद हो गया और आपके योगदान का सम्मान लोगों से मिलना प्रारंभ हो गया आजादी के बाद आप कयी शैक्षिक व सामाजिक संस्थाओं में संस्थापक अध्यक्ष रहे हरदोई में बेणीमाधव के नाम से जितने भी स्कूल कालेज हैं वो सब आपकी देन हैं आपने 14 अक्टूबर 1986 को इस दुनिया को अलविदा कह दिया और बिलग्राम  एक रोशन सितारे से महरूम हो गया।

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