महिला दिवस पर एक दिन की प्रधानाध्यापिका बनी रुची

माधौगंज,हरदोई।अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस के शुभ अवसर पर मल्लावां, संविलयन विद्यालय बाँसा में छात्रा रुचि को  प्रधानाध्यापिका का एक दिवसीय प्रभार दिया गया। छात्रा रुचि के अपने पद और दायित्यों का निर्वहन, शिक्षण कार्य , प्रसाशनिक कार्यों आदि का जायजा लिया।महिला सशक्तिकरण की दिशा में संविलयन विद्यालय बाँसा ने अपनी उपादेयता तय की इस दिवस पर एलोवीरा आयुर्वेदिक पेड़ को लगवाकर एक स्वस्थ्य परंपरा की शुरुवात की गयी। विद्यालय के शिक्षक, बालिका शिक्षा मल्लावां के नोडल श्री प्रवीण कुमार ने बताया कि।हर दिन महिला का दिन है, हर दिन शक्ति का पर्व है , हर दिन इंसानियत का उत्सव है,दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र जिस का नाम है भारत उसकी संस्कृति के मूल में ही है भारत माता आज हम इस देश की पावन धरा को भारत माता के नाम से संबोधित करते हैं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मायनो का सीधा सरोकार भारतीय संस्कृति के मूल में ही है। किन्तु यह आवश्यक है जानना कि आज महिला सशक्तिकरण की आवश्यकता ही क्यों है ?  दहेज प्रथा, विधवा विवाह, कन्या भ्रूण हत्या,लैंगिक विभेद,बाल विवाह, महिलाओं के साथ दुराचार आदि के मामलों में आज हम सैद्धान्तिक पक्ष अख्तियार करते हैं। किंतु ब्यवहारिक सशक्तिकरण अर्थात एप्लाइड एम्पॉवरमेंट की हकीकतों से मीलों दूर हैं। भले ही भारतीय संविधान लैंगिक समता की बात करता हो, महिला सशक्तिकरण को फलीभूत बनाने की संवैधानिक, कानूनी मान्यता देता हो। किन्तु सामाजिक संकीर्ण वैचारिक मतभेदों के बीच हम और आप जीते है। आज भी सुदूर  ग्रामीण अंचल क्षेत्रों में लैंगिक विभेद की सामाजिक मान्यता कम नहीं हुई हैं। यह मान्यतायें हम और आप से ही चलती है , जहाँ शहरी क्षेत्रों का एक बड़ा तबका या सुशिक्षित वर्ग इन विचारों मान्यताओं का खंडन करता है। किन्तु सुदूर ग्रामीण क्षेत्र के चंद लोगों की सोंच से ही आज आधुनिकता के इस युग मे भी  पुरुषों की साक्षरता महिलाओं से लगभग 20 प्रतिशत अधिक है। आज भी देश का बड़ा तबका  शैक्षिक अवसरों की समता से उन्हें दूर रखता है। देश दुनिया मे जहाँ जहाँ भी समता के अवसर  उन्हें सुलभ है उन देशों के इतिहास में महिलाएं कल्पना की उड़ान भर रहीं हैं। जो भी राष्ट्र, समाजकाल उन्हें लैंगिक विभेद की भावनाओं से ऊपर उठकर देख पाया है वह देश आज तरक्की की राह पर है। देश की आधी आबादी के अधिकारों, अवसरों को रूढ़िवादी विचारधाराओं में बांधकर देखने  के नतीजे उन्होंने भुगते हैं। आज सबला नारी ,शक्ति स्वरूपा ने अपने राष्ट्रकाल के हर क्षेत्र में अपना लोहा मनवाया है । भारतीय संस्कृति की  धार्मिक मान्यताओं ने उन्हें देवी स्वरूपा के सरोकारों से जोड़ा है, आज समय आ गया है, इस समाज के अभिन्न अंग, जिम्मेदार नागरिक होने के नाते कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के सरोकारों , उद्देश्यों के मायनों को समझते हुए, लैंगिक विभेद की मान्यताओं से ऊपर उठकर देखें। इस समाज के एक बड़े तबके को अवसरों की समता देते हुये उन्हें आगे बढ़ाएं।इस अवसर पर श्री सत्येंद्र कुमार, खालिद जुबैर अंसारी जी, संतोष कुमार, लवकुश, पिंकी विश्वकर्मा,ममता देवी शिक्षक मौजूद रहे।इसी तरह एक दूसरे कार्यक्रम मेंअन्तराष्टीय महिला दिवस के अवसर पर मिशन शक्ति के अन्तर्गत युवा कल्याण विभाग हरदोई द्वारा कन्या भ्रूण हत्या /बेटी पढ़ाओं बेटी बचाओ विषय पर चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन स्थानीय ग्लोबल कैरियर पब्लिक स्कूल में किया गया।जिसमें विभिन्न विद्यालयों ग्लोबल कैरियर पब्लिक स्कूल सरस्वती ज्ञान मंदिर, मनिया देवी, फ़ूलमती मा सरस्वती विद्या मन्दिर व मंगल दल के सदस्यो ने प्रतिभाग किया |प्रतियोगिता में  सुमंग सिंह ने प्रथम रिद्धि गौतम ने द्वितीय ,कुमकुम गौतम ने तृतीय स्थान प्राप्त किया विजेता प्रतिभागियो को पुरस्कृत किया गया कार्यक्रम में प्रधानाचार्य मोबीन अहमद, रिन्कू कुशवाहा,, नसरीन, युवक मंगल दल अध्यक्ष सौरभ कुमार गुप्ता, युवती मंगल दल अध्यक्ष इतिशा गुप्ता, इकबाल, रोशनी बाथम आदि मौजूद रहे संचालन सौरभ कुमार गुप्ता द्वारा किया गया।

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