दस दिवसात्मक शिविर में देश भर से जुड़े संस्कृतज्ञ

स्वामी विवेकानंद संभाषण शिविर में बजा संस्कृत एवं संस्कृति का डंका
विवेकानंद को दी सांस्कृतिक राजदूत की संज्ञा
हरदोई।संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार को समर्पित संस्था “आधुनिको भव संस्कृतं वद” एवं “सर्वत्र संस्कृतम्” संस्था के तत्वावधान में दसदिवसात्मक अंतर्जालीय स्वामी विवेकानंद स्मृति संस्कृत संभाषण शिविर में उनके व्यक्तित्व को रेखांकित करते हुए देश भर के दर्जनों संस्कृतज्ञों ने संस्कृत में विचार रखे।
समारोह का उद्घाटन करते हुए संस्कृत भारती के अध्यक्ष एवं सोमनाथ विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. गोपबंधु ने कहा कि विश्वमंच की धर्म संसद में विचार रखकर स्वामी विवेकानंद ने भारत के सांस्कृतिक राजदूत जैसी की भूमिका निभायी। उन्होंने धर्मग्रंथों से लेकर भारतीय संस्कृति को जानने-समझने के लिए संस्कृत के महत्व को रेखांकित किया और पठन-पाठन पर बल दिया।मुख्य अतिथि डॉ. अनिल कुमार सिंह विशेष सचिव गृह विभाग उप्र शासन ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के व्यक्तित्व में भारतीयता रची-बसी थी और उनका मानवता को समर्पित रहा। डॉ. सिंह ने संस्कृत को जनभाषा बनाने की सोच के लिए आधुनिको भव संस्कृतं वद अभियान एवं उससे जुड़े संस्कृतज्ञों के प्रयासों की सराहना की।अध्यक्षता करते हुए ‘आधुनिको भव संस्कृतं वद अभियान’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं विहार संस्कृत संजीवन समाज, पटना के महामंत्री डॉ. मुकेश कुमार ओझा ने दसदिवसात्मक संस्कृत संभाषण शिविर में देश भर जुड़ने वाले संस्कृतज्ञों एवं संस्कृतसेवियों का आभार जताया। कहा, स्वामी विवेकानंद जिस संकल्प से भारतीय धर्म-संस्कृति के प्रति समर्पित रहे. संस्कृत को जनभाषा बनाने के लिये आज वैसे ही संकल्पवान सत्पुरुषों की आवश्यकता है।
दिल्ली के संस्कृतज्ञ डॉ. शैलेंद्र कुमार सिन्हा ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने विश्व पटल पर भारत के जिस चिंतन और मेधा को प्रस्तुत किया उस ज्ञान-विज्ञान की प्राप्ति के मूल में संस्कृत में रचे भारतीय वांगमय एवं धर्मग्रंथ ही हैं।गंगादेवी महाविद्यालय पाटलिपुत्र की सहाचार्या डॉ. रागिनी वर्मा, वरिष्ठ संस्कृत प्रचारक डॉ.  मिथिलेश झा व डॉ. अनिल कुमार चौबे, योग विज्ञान शोध संस्थान बेंगलूरू के अध्यक्ष अभिषेक चौबे ने संस्कृत मे स्वामी विवेकानंद के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। संस्कृत में संचालन अरविंद महाविद्यालय दिल्ली विश्वविद्यालय के सहायक आचार्य पिन्टू कुमार ने किया।
विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ अनिल कुमार चौबे, वरिष्ठ संस्कृत प्रचारक, डॉ शैलेन्द्र कुमार सिन्हा, वरिष्ठ संस्कृत प्रचारक, पटना उच्च न्यायालय के अधिवक्ता उग्र नारायण झा, डॉ रागिनी वर्मा, पिन्टू कुमार ने भी संस्कृत संभाषण शिविर के महत्त्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।प्रमोद कुमार उपाध्याय ने स्वस्वित वाचन, डॉ रागिनी वर्मा ने आगत अतिथियों का स्वागत तथा मंच का संचालन अभियान के संयोजक एवं अरविंद महाविद्याय दिल्ली विवि के सहायक आचार्य पिन्टू कुमार ने किया। श्रद्धा कुमारी ने धन्यवाद ज्ञापित किया।संस्कृत संभाषण प्रतियोगिता में उपासना आर्या को प्रथम पुरस्कार, सुषमा सिंह एवं रविकांत तिवारी को द्वितीय पुरस्कार, डॉ. विभा कुमारी झा एवं चन्द्रकांत मिश्र को तृतीय पुरस्कार तथा प्रेमलता कश्यप, कृष्णकांत मिश्र, प्रमोद कुमार उपाध्याय, विजेन्द्र सिंह एवं अनामिका कुमारी को विशेष पुरस्कार प्रदान किया गया। शिविर के सभी सदस्यों को शिविर का प्रमाण-पत्र भी प्रदान किया गया।

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