बिलग्राम, हरदोई: मैदानपुरा मोहल्ले में हजरत जहूरुद्दीन शाह, जिन्हें प्यार से छोटे मियां के नाम से जाना जाता है, का तीन दिवसीय उर्स 15 से 17 अप्रैल तक बड़े ही श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस रूहानी आयोजन ने नगर में आध्यात्मिक माहौल को और गहरा कर दिया।

उर्स का शुभारंभ 15 अप्रैल की रात को हाफिज रिजवान की दिल को छू लेने वाली कुरान तिलावत के साथ हुआ। इसके बाद कन्नौज से पधारे मौलाना शाहनवाज ने मिलाद की महफिल में अपनी तकरीर से श्रद्धालुओं के दिलों को रोशन किया।
दूसरे दिन, 16 अप्रैल को नमाज-ए-जोहर के बाद हजरत छोटे मियां का कुल शरीफ हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। यह पल सभी के लिए गहरी आस्था और एकजुटता का प्रतीक बना।
17 अप्रैल, उर्स का अंतिम दिन, सुबह नमाज-ए-फजर के बाद कुरान ख्वानी के साथ शुरू हुआ। सुबह 9 बजे जिक्र-ए-औलिया और मुशायरे का आयोजन हुआ, जहां शायरों ने छोटे मियां की शान में मन्कबतें पेश कर माहौल को और रूहानी बना दिया। मौलाना शम्स तबरेज खाकी जहूरी ने बुजुर्गों की पवित्र जिंदगी और उनके योगदान पर प्रकाश डालते हुए जायरीनो को प्रेरित किया। दोपहर 3 बजे गागर का जुलूस निकाला गया, जो आस्था और भक्ति का जीवंत प्रदर्शन था।

रात को 9 बजे से सुबह 4:30 बजे तक कव्वाली का रंगारंग कार्यक्रम हुआ, जिसमें संडीला के बोबी कव्वाल, फर्रुखाबाद के कमालुद्दीन कव्वाल और मारूफ कव्वाल ने अपनी सुरीली कव्वालियों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी प्रस्तुतियों ने बुजुर्गों की शान को बखूबी बयां किया। सुबह 4 बजे हजरत अनीस मियां की दुआ के साथ आखिरी कुल शरीफ हुआ, जिसने इस पवित्र आयोजन को भावपूर्ण समापन प्रदान किया।

खानकाह की ओर से सभी मुरीदों को तबर्रुक वितरित किया गया, जो इस आयोजन की याद को और खास बनाता है। इस अवसर पर अफसर मियां जहूरी, अख्तर हुसैन जहूरी, डॉ. रफत हुसैन जहूरी, असगर जहूरी बिलग्रामी सहित नगर के कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे, जिनकी मौजूदगी ने इस आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया।
यह उर्स न केवल छोटे मियां की याद में एक श्रद्धांजलि था, बल्कि आपसी भाईचारे, आध्यात्मिकता और एकता का भी प्रतीक बना।















