भिक्षावृत्ति और श्रम में खोता बचपन


गली मोहल्ला चौक चौराहों पर अभी भी भीख मांग रहे मासूम
बिलग्राम,हरदोई। गरीबी और मजबूरी मासूमों की जिंदगी को तबाह कर रही है। दो वक्त की रोटी के लिए आज भी नन्हे नन्हे मासूम मंदिर, मस्जिद, सरकारी विभागों के कार्यालयों के बाहर चौक चौराहों पर अपनी विवशता के कारण भीख मांगते नजर आ रहे हैं।

जिस उम्र में उनके हांथो में किताब और कलम होनी चाहिए उस उम्र में ये गरीब बच्चे आफिस होटलों में किसी को चाय पिलाते या किसी के बूट पालिश करते नजर आ जाते हैं।देखा गया है कि बहुत से खुद्दार बच्चे किसी के सामने हाथ नहीं फैलाते और मेहनत कर अपना और अपने परिवार का सहारा बन रहे हैं लेकिन अफसोस की बात ये है कि जिस उम्र में उनकी पीठ पर बस्ते होने चाहिए, उस उम्र में वो बोझा ढो रहे हैं। अभी हाल ही में जिलाधिकारी अविनाश कुमार ने तहसीलवार टास्क फोर्स का गठन कर बाल श्रमिकों के चिन्हांकन हेतु विशेष अभियान चलाने की शुरुआत की थी, ये अभियान 25 मार्च तक चलना था लेकिन शायद इस ओर कोई भी अधिकारी संजीदा होकर अपनी जिम्मेदारी निभाने को तैयार नहीं है।जिन अधिकारियों को इस की जिम्मेदारी मिली उनके ही इर्द-गिर्द मासूम भीख मांगने का काम कर रहे हैं। यही नहीं, नगर के मुख्य चौराहे पर तो एक बालक टूटी चप्पलों की सिलाई करता नजर आया। जब उसके सामने कैमरे को घुमाया गया तो खुश होकर उसने दो उंगलियों का इशारा किया, अब ऐसे में यदि जिलाधिकारी जी इस टास्क फोर्स का गठन कर सार्थक परिणाम की उम्मीद लगा रहे तो शायद गलत है।

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