खानकाह में ही सुपुर्द ए खाक हुए, मीर सय्यद ताहिर मियाँ

आखरी दीदार को उमड़ी हजारों की भीड़, बेटे ने पढ़ाई नमाज़ ए जनाज़ा

बिलग्राम हरदोई ।। इस्लाम धर्म और सूफीवाद की मशहूर मारूफ खानकाहों में एक बिलग्राम की खानकाह ए वाहिदीया तैय्याबिया के सज्जादा नशीन और सूफी बुजुर्ग मीर अब्दुल वाहिद बिलग्रामी रहमतुल्लाह अलैह के जांनशीन, आल ए रसूल हजरत मीर सय्यद ताहिर मियाँ को उनकी ही खानकाह में 2:30 बजे हजारों की संख्या में आये मुरीदों की मौजूदगी में सुपुर्द ए ख़ाक कर दिया गया।

उनका इंतकाल मंगलवार को लखनऊ में भारतीय समय के मुताबिक 3 बजे हुआ था, जैसे ही उनके इंतकाल की खबर फैली, उनके मुरीदों का तांता लगना शुरू हो गया,

उनका जनाज़ा बिलग्राम पहुंचते ही लोग अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े भारी भीड़ को देखते हुए उनके बेटे सय्यद सुहैल मियाँ ने नमाज़ ए जनाज़ा का समय बुधवार दोपहर 2 बजे मुकर्रर किया , ताकि ज्यादा से ज्यादा आने वाले मुरीदों को मीर सय्यद ताहिर मियाँ के अंतिम दर्शन हो सके, सुबह होते होते खानकाह उनके चाहनेवालों से खचाखच भर गयी,

भीड़ को देखते हुए प्रशासन भी मुस्तैद रहा कई थानों की फोर्स भीड़भाड़ पर नजर रखती रही। जोहर की नमाज़ के बाद दिये गये वक्त पर बाहर बने नये ग्राउण्ड में आपकी नमाज़ ए जनाज़ा आपके ही बेटे सय्यद सुहैल मियाँ के द्वारा पढ़ाई गयी, जिसके बाद उन्हें मीर सय्यद तैय्यब बिलग्रामी रहमतुल्लाह अलैह की मजार के पश्चिमी ओर अहाते में सुपुर्द ए खाक कर दिया गया।

बताया गया है कि मीर सय्यद ताहिर मियाँ तीन भाइयों में बड़े से छोटे (मंझले) थे आप से पहले आपके दोनों भाइयों का इंतकाल हो चुका है और अब आप ने भी इस दुनिया को अलविदा कह दिया, आपके जाने से तमाम मुरीदों में गम का माहौल देखा गया आपके अख़लाक़ और किरदार का चर्चा सुनकर लोग दूर दूर से आपको मिलने के लिए आते थे आपके चेहरे पर हमेशा रूहानी मुस्कुराहट तारी रहती देखने वाले देख कर ही समझ जाते की आप आले रसूल हैं। आपने गंगा जमुनी तहजीब को बरकरार रखने में हमेशा बल दिया और इस्लाम के प्रचार-प्रसार के लिए आप हमेशा काम करते रहे।

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