प्राकृतिक चिकित्सा न केवल उपचार की पद्धति अपितु एक जीवन पद्धति-डॉक्टर राजेश मिश्रा 

हरदोई।प्राकृतिक चिकित्सा न केवल उपचार की पद्धति है, अपितु यह एक जीवन पद्धति है। इसे ‘औषधि विहीन उपचार पद्धति’ कहा जाता है।
शहीद उद्यान स्थित कायाकल्प केन्द्र में ‘चतुर्थ राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा दिवस’ पर आयोजित कार्यक्रम में केन्द्र के संस्थापक व प्रख्यात नेचरोपैथ डॉ० राजेश मिश्र ने बताया कि वे जिले के पहले प्राकृतिक चिकित्सक हैं और लगभग तीस वर्षों से कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जिन पांच तत्वों से शरीर का निर्माण हुआ है उन्हीं के समुचित प्रयोग से उपचार किया जाता है और ऐसा आहार-बिहार बताया जाता है जिससे रोगी की जीवनी शक्ति बढ़ जाती है और विभिन्न प्रकार के रोगों से मुक्ति मिलती है।
डॉक्टर राजेश ने बताया कि प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति से शरीर में संचित विषों को मल निष्कासक अंगों मलाशय, मूत्राशय, त्वचा और फेफड़ों को सक्रिय करके बाहर निकाल दिया जाता है। इसके साथ क्षारीय आहार सेवन कराते हैं, जिससे रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है और शरीर रोगमुक्त हो जाता है।
डॉ मिश्र ने बताया कि उन्होंने प्रकृति की ओर लौटने का सन्देश देने के लिए पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश तथा नेपाल में काठमांडू तक कई यात्राएं की हैं।
डॉक्टर मिश्र ने कहा कि उन्होंने उत्तर प्रदेश के समस्त मण्डलों में ‘चौका चेतना यात्रा’ की। कहा स्वास्थ्य का रास्ता चौका से होकर जाता है। इम्यूनिटी बढ़ाने में ‘वैज्ञानिक ढंग से पकाये गये भोजन की महत्वपूर्ण भूमिका है। कहा इतने सालों से चौका चेतना से जागरुकता फैलाने का काम कर रहे हैं, पर इसकी महत्ता को पूर्व व वर्तमान सरकार किसी ने भी नहीं समझा।
नेचरोपैथ श्री मिश्र ने बताया कि वे अपने हरदोई जिले को स्वास्थ्य रक्षा हेतु गोद लेकर कार्य कर रहे हैं। वे अभी तक जिले के समस्त शहीद ग्रामों, ब्लॉकों, थानों तथा कई स्कूल-कॉलेजों में प्राकृतिक जीवन जीने तथा चौका चेतना के अन्तर्गत भोजन पकाने की वैज्ञानिक विधि की जानकारी दे चुके हैं। बताया वे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के गाँवों में ७ अप्रैल २०२२ तक जा-जाकर रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की विधि बतायेंगे। कहा संक्रमण काल चल रहा है, इसलिए जीवनीशक्ति बढ़ाने के लिए प्राकृतिक जीवनशैली को अपनाना ही होगा।
कायाकल्प केंद्र में आए हुए लोगों को प्राकृतिक चिकित्सा तथा भोजन पकाने की वैज्ञानिक विधि के बारे में जानकारी दी गई इस अवसर पर डॉ श्रुति दिलीरे,अनामिका, दीपाली,अभिषेक पाण्डेय, डॉ वीरेश शुक्ल, अभियोजन अधिकारी पद्मनाभम् स्वामी,गोविन्द गुप्त,सोनू गुप्त,दिव्य प्रकाश अवस्थी सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

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