हरदोई। अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस के अवसर पर रविवार को समाधान अभियान और इंडिया पेस्टिसाइड्स लिमिटेड द्वारा “चुप्पी तोड़: हल्ला बोल” परियोजना के अंतर्गत हरदोई में पॉक्सो जागरूकता गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने वाले पॉक्सो अधिनियम (Protection of Children from Sexual Offences Act) की जानकारी समाज के हर वर्ग तक पहुँचाना और समुदाय को संवेदनशील बनाना रहा।
गोष्ठी का संचालन समाधान अभियान की संस्थापक सौम्या द्विवेदी ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा, “बच्चों की सुरक्षा हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी हर व्यक्ति तक पहुँचना आवश्यक है, क्योंकि जब तक समाज जागरूक नहीं होगा, तब तक बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों को रोक पाना कठिन रहेगा। जागरूकता ही सुरक्षित समाज की पहली सीढ़ी है।”
कार्यक्रम में आशा कार्यकर्ताओं की विशेष भागीदारी रही। आयोजकों का मानना है कि आशा कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर समुदाय से सीधे जुड़े होते हैं, इसलिए उनके माध्यम से यह संदेश अधिक प्रभावी तरीके से घर-घर तक पहुँच सकता है। आशा कार्यकर्ताओं ने भी इस अभियान को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया और कहा कि वे अपने क्षेत्र में बच्चों और अभिभावकों को पॉक्सो कानून के बारे में जानकारी देंगी।
गोष्ठी में उपस्थित वरिष्ठ अधिकारियों और समाजसेवियों ने भी बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि बच्चों को यौन हिंसा से बचाने के लिए कानून के साथ-साथ समाज का सहयोग भी उतना ही जरूरी है। वक्ताओं ने पॉक्सो अधिनियम के तहत पीड़ितों को मिलने वाले कानूनी अधिकारों, शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया और त्वरित न्याय की व्यवस्था पर विस्तृत जानकारी साझा की।
इस अवसर पर बाल मित्र केंद्र के समन्वयक सूरज शुक्ला और प्रियांशु अवस्थी भी मौजूद रहे। दोनों ने सामुदायिक जागरूकता की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि यदि समय पर शिकायत और कानूनी प्रावधानों का सही उपयोग किया जाए, तो बच्चों को न्याय दिलाने में आसानी होती है।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने संबंधित विभागों, सामाजिक संस्थाओं और स्थानीय प्रशासन से इस पहल को निरंतर समर्थन देने की अपील की। उन्होंने कहा कि शांति दिवस का यह आयोजन तभी सार्थक होगा जब समाज बच्चों के प्रति अधिक संवेदनशील और सतर्क बने।
यह गोष्ठी न सिर्फ पॉक्सो अधिनियम की जानकारी का माध्यम बनी, बल्कि इसने यह संदेश भी दिया कि बच्चों की सुरक्षा में समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। इस तरह “चुप्पी तोड़: हल्ला बोल” परियोजना ने शांति दिवस को एक सशक्त सामाजिक जागरूकता अभियान में बदल दिया।















