ऐ तिरंगा तेरी हम शान न जाने देगें, सर तेरा तुझको कभी हम न झुकाने देगें

बिलग्राम में आयोजित हुआ मुशायरा एवं कवि सम्मेलन

*कमरुल खान*

बिलग्राम हरदोई। । गणतंत्र दिवस के अवसर पर बिलग्राम के मैदान पुरा स्थित बाल कल्याण विद्यालय में एक कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का आयोजन किया गया जिसमें विभिन्न जनपदों से आए शायरों और कवियों ने अपनी रचनाएं सुना कर श्रोताओं को तारीफ करने के लिए प्रेरित किया।ये महफ़िल ए मुशायरा हुज़ूर बिलग्रामी की सरपरस्ती और जनाब शिव कुमार बिलग्रामी की अध्यक्षता में आयोजित हुआ मंच के संचालन का काम असगर बिलग्रामी ने बखूबी निभाया महफ़िल में शायरी की शुरुआत नश्तर मल्लावी ने की उन्होंने इस तरह पढ़ा कि
*हजारों जान दीं सूली चढे हम भी मगर फिर भी*
*बताओ तो हमे तुम आजमाओगे भला कब तक*


रायबरेली के खलील फरीदी ने अपने अंदाज में पढ़ा कि

लबो तक मुस्कुराहट आते आते लौट जाती है

न हो मां बाप का साया तो बच्चे टूट जाते हैं।

मल्लावां के डॉक्टर रियाज वरहक ने सुनाया
*तअल्लुकात सभी तोड़ दीजिए लेकिन*
*ये याद रखिए फिर राबता हो सकता है*
पवन कश्यप ने कहा कि
*एक गीत ऐसा भी लिख दो मायी*
*जिसमें हो खुशबू वतन की समाई।*


दिल्ली के मशहूर शायर शिवकुमार बिलग्रामी ने कहा कि
*बात करने का सलीक़ा मैने पाया जिसमें*
*इक वही शख्स मुझे शहर में खामोश मिला*
इसके अलावा लखनऊ के मशहूर शायर मोईद रहबर और हरदोई के कवि अजीत शुक्ल, सरवर अब्बास बिलग्रामी, शादाब मल्लानवी, तौसीफ हसरत मल्लानवी, इमरान बिलग्रामी, अकरम मल्लानवी,आदि ने भी अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया इसी तरह असगर बिलग्रामी ने अपनी शायरी से समा बांधा और कहा कि
*बिल यकीं वो घर बनेगा मिस्ल ए दोज़ख दोस्तों*
*राह से बेराह जिस घर का बड़ा हो जायेगा*
देश भक्ति में ढूबे हुए शेर पढते हुए हुज़ूर बिलग्रामी ने कहा कि
*ऐ तिरंगा तेरी हम शान न जाने देगें*
*सर तेरा तुझको कभी हम न झुकाने देगें*
बिलग्राम के नौजवान और उभरते हुए शायर कमर बिलग्रामी के शेर
सबक वफा का पढ़ाया उनको सलीका हमने सिखाया जिनको

मिली जरा सी जो उनको शोहरत वो आंखे हम को दिखा रहे हैं

से खुब वाहवाही लूटी भरपूर सर्द रात में भी शायरों और कवियों की रचनाओं को सुनने के लिए श्रोता रात दो बजे तक डटे रहे।

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