March 25, 2026 8:24 pm

एलपीजी संकट गहराया: ग्रामीण इलाकों में फिर जलने लगे मिट्टी के चूल्हे

कमरुल खान

बिलग्राम हरदोई। । ग्रामीण क्षेत्रों में एलपीजी गैस की किल्लत अब गंभीर रूप लेती जा रही है। समय पर गैस सिलेंडर न मिलने के कारण लोग मजबूरी में फिर से पारंपरिक मिट्टी के चूल्हों पर खाना बनाने लगे हैं। इससे जहां एक ओर लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है, वहीं धुएँ से स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
स्थानीय उपभोक्ताओं का कहना है कि गैस रिफिल की बुकिंग कराने के बावजूद उन्हें एक सप्ताह से अधिक समय तक सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। खासकर महिलाओं को रोज़मर्रा के कामकाज में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है और उन्हें लकड़ी व अन्य पारंपरिक ईंधनों का सहारा लेना पड़ रहा है।
गौरा गैस एजेंसी में कार्यरत कर्मचारी आकाश ने बताया कि पिछले पांच दिनों से गैस सप्लाई की गाड़ी नहीं आई है। उन्होंने बताया कि 16 मार्च से कई उपभोक्ताओं की बुकिंग लंबित है और अब तक उन्हें भरे हुए सिलेंडर उपलब्ध नहीं कराए जा सके हैं।
इसी बीच, इस पूरे मामले में कुछ गैस एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों के अनुसार, उज्ज्वला योजना के तहत कुछ लाभार्थियों को उनके क्षेत्र से दूर—यहां तक कि बिलग्राम क्षेत्र के बाहर—भी गैस कनेक्शन दे दिए गए हैं। ऐसे में उपभोक्ता सब्सिडी के लालच में गैस बुक तो कर देते हैं, लेकिन दूरी अधिक होने के कारण सिलेंडर लेने नहीं पहुंच पाते।
आरोप है कि इस स्थिति का फायदा उठाते हुए कुछ एजेंसी कर्मचारी उपभोक्ताओं से डीएसी नंबर लेकर खुद सिलेंडर उठा लेते हैं और उन्हें ऊंचे दामों पर बेच देते हैं, जबकि सब्सिडी की राशि सीधे उपभोक्ता के खाते में चली जाती है।
यदि ये आरोप सही हैं, तो यह न केवल सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग का मामला है, बल्कि जरूरतमंद उपभोक्ताओं के हक पर भी सीधा प्रहार है।
ग्रामीण इलाकों में बढ़ती इस समस्या ने स्वच्छ ईंधन की उपलब्धता और वितरण प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जरूरत है कि संबंधित विभाग इस मामले की जांच कर जल्द से जल्द आपूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त करे, ताकि लोगों को धुएँ से भरे पुराने दौर में लौटने से बचाया जा सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

और पढ़ें

Marketing Hack 4U

Cricket Live Score

Rashifal

और पढ़ें