तीसरी बेटी के जन्म पर मां ने त्यागे प्राण,बेटियां अभी भी अभिशाप क्यों

सरकार की दर्जनों योजनाओं के बावजूद ग्रामीण ,क्षेत्रों में जागरूकता की कमी तो नही
दहेज के दानवो पर सरकार सख्त कानून बनाने से बचती क्यों
पाली,हरदोई।जहां एक तरफ बेटू के जन्म पर  लोग खुशियां मनाते हैं।तो वही  आज भी  बेटियों के जन्म पर  जहां कुछ परिवारों में मातम सा माहौल होता है। तो वही  सरकार  की बेबसी भी कहीं ना कहीं  इसके लिए जिम्मेदार हैं। सरकार की लाख कोशिशों के बावजूद मध्यमवर्गीय व गरीब परिवार बेटियों के जन्म पर लाचार क्यों।इसके पीछे का कड़वा है पर एक सत्य यह भी की बेटियों की सुरक्षा शादियों में दहेज जिस पर सरकार आजादी के बाद से अब तक बेटियों के साथ न्याय नही कर पाई दहेज रूपी दानव अभी भी मध्यंमवर्गीय परिवारों के लिये किसी अभिशाप से कम नही इसके जिम्मेदार शिर्फ़ मां बाप ही सरकार व जिम्मेदार भी ।देश मे बेटियों ने जहां हर क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर यह साबित कर दिया है। कि हम बेटों से किसी भी मायने में कमतर नहीं हूं उनकी प्रतिभा का लोहा मानते हुए शासन ने भी उन्हें समानता का अधिकार प्रदान कर दिया इसके बावजूद समाज की पुरुष प्रधान सोच बदलने का नाम नहीं ले रही है।इलाकों में कुछ इसी प्रकार का एक मामला प्रकाश में आया है जहां तीसरी बेटी के जन्म की सूचना पर एक मां की सदमे से मौत हो गई।सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पाली थाना क्षेत्र के कन्हारी गाँव निवासी राजन मिश्रा की शादी 12 साल पहले सदुल्लीपुर निवासी पूनम मिश्रा से हुई थी शादी के बाद पूनम को दो बेटियां हुई  तीसरे बच्चे में परिजन बेटे की आस लगाए थे लेकिन ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था  बीती शाम पूनम ने फिर तीसरी बच्ची को जन्म दिया जिसकी जानकारी होने पर पूनम की तबीयत अचानक बिगड़ गई परिजन आनन-फानन में महिला को हरदोई के एक निजी अस्पताल ले गए जहां डॉक्टरों ने पूनम को मृतक घोषित कर दिया पूनम की मौत से दूधमूही बच्ची के अलावा 5 वर्षीय बेटी गुंजन 3 वर्षीय बेटी भी रीतू के सिर से मां का ममता रूपी साया उठ गया पूनम के निधन से परिजनों का रो रो कर बुरा हाल है।

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