कछौना/हरदोई। विकास खण्ड कछौना के अंतर्गत महरी माइनर सहित क्षेत्र के ज्यादातर माइनरों की मानक विहीन सिल्ट सफाई हो रही है। साथ ही तमाम माइनरों की कागजी खोदाई कर जिम्मेदार अधिकारी व ठेकेदार सरकारी रकम ठिकाने लगाने में जुटे हुए हैं। महरी, समसपुर व बघौली माइनर में सिल्ट सफाई के नाम पर घसकट्टी कराई जा रही है। किसानों के खेतों में फसलों को पानी पहुंचाने हेतु माइनरों की सिल्ट सफाई कराई जा रही हैं। परन्तु जिम्मेदारों ने सिल्ट साफ के नाम पर नया खेल शुरू कर दिया है। सफाई के बदले सिर्फ तली पर उगी घास की कटाई हो रही है। कछौना क्षेत्र का महरी, समसपुर व बघौली माइनर इसकी नजीर है। शारदा नहर से ग्राम अंटा, महरी, सेमरा कलां को जाने वाले महरी माइनर की सिल्ट सफाई के रूप में घसकट्टी कराकर सिर्फ कागजी कोरम पूर्ति की जा रही है। उक्त सभी माइनरों में सिल्ट सफाई का कार्य नहर विभाग के तहत किये जा रहे है। ठेकेदार मजदूरों को लगाकर सफाई का कार्य करा रहें है। इसमें तली में जमी मोटी सिल्ट बाहर निकालने की बजाय हल्की घास को काटा जा रहा है। काम की गति भी इतनी धीमी है, मानो नहर में पानी आने का इंतजार किया जा रहा है। नहर में पानी आते ही उक्त माइनरों में छोड़ दिया जाएगा। जिससे मानक विहीन कराई गई सिल्ट सफाई को आसानी से छिपाया जा सके। सिल्ट सफाई कार्य की स्थिति देख किसानों में असंतोष बना हुआ है। क्षेत्र के किसान सुरेंद्र सिंह, प्रदीप सिंह, मोहन लाल, रामआसरे, बलिराम, दुर्गेश सिंह, रमेश, रामपाल, छत्रपाल आदि का कहना है कि ठेकेदार व जिम्मेदारों की मनमानी से माइनर की सफाई नहीं हो रही, सिल्ट जस की तस है। यही हाल रहा तो टेल तक पानी पहुंचना इस बार भी संभव नहीं हो पाएगा। महरी माइनर की दूरी लगभग 4 किलोमीटर है, परंतु विभागीय अधिकारियों का कहना है, उक्त माइनर का टेल 1.6 किलोमीटर पर है, बाकी माइनर का भाग तेलगूल है। किसानों ने विभागीय अधिकारियों से मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई व सिल्ट सफाई कार्य में पारदर्शिता लाने की मांग की है। इस संबंध में अवर अभियंता सोमेंद्र कुमार ने बताया विभाग द्वारा माइनरों में एक किलोमीटर की सिल्ट सफाई हेतु 18 हजार रुपये की धनराशि स्वीकृत हुई है। जिसके मानक अनुसार 15 से 20 सेंटीमीटर सिल्ट सफाई कराने का प्रावधान है। इसलिए माइनर में सिल्ट की पूरी सफाई कराना असंभव है।















