March 16, 2026 4:37 pm

गेहूं के भूसे की किल्लत से जूझ रहे पशुपालक

कंबाइन मशीन से गेहूं की फसल की कटाई अब पशुपालकों के लिए बनी जी का जंजाल
पाली,हरदोई। पशुपालक पूरे दिन कड़ी मशक्कत कर जैसे-तैसे अपने पशुओं के लिए धान की पराली गन्ने के अगौले आलू की बेल आदि से कर रहे पशुओं के चारे का इंतजाम तो करते हैं जो ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहा है।इस समय इलाके के पशुपालक चारे की भीषण समस्या से जूझ रहे हैं।गेहूं के भूसे की कीमतें आसमान छू रही हैं लाचार पशुपालक जैसे तैसे धान की पराली और गन्ने के अगौले से पशुओं की भूख मिटाने को मजबूर हैं।
आधुनिकता के युग में कंबाइन से गेहूं की फसल की कटाई,पशुपालकों के लिए जी का जंजाल बन गई है कंबाइन की कटाई के दुष्परिणाम अब खुलकर सामने आने लगे हैं जिससे पशुपालकों की नींद उड़ी हुई है एक मोटे आंकड़े के अनुसार विकासखंड भरखनी  में पशुपालकों के पास 50 हजार से 60 हजार जानवर है जिनके लिए पशुपालकों के लिए चारे का इंतजाम करना मुश्किल हो रहा है जहां कुछ माह पहले गेहूं के भूसे की कीमत 500 से ₹600 प्रति कुंतल थी वहीं अब अचानक 1400से 1500 रुपए प्रति कुंटल पहुंच गई है जबकि गेहूं 18 सौ रुपए से 19 सौ रुपए प्रति कुंतल बिक रहा है जिन पशुपालकों ने सीजन पर भूसे का भंडारण नहीं किया है उन्हें अब महंगी कीमतों पर भूसा खरीदना पड़ रहा है पशुपालक पशुपालक पूरे दिन कड़ी मशक्कत कर जैसे तैसे गन्ना के अगौले धान की पराली आलू की बेल आदि से अपने पशुओं के लिए दो जून के चारा इंतजाम करते हैं जो ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहा है कुछ पशुपालक पशु  बाजार में अपने जानवरों को औने पौने दामों पर बेचने के लिए मजबूर हैं जानकारों की बात पर गौर करें तो एक दिन मे एक स्वस्थ पशु को 6 से 9 किलो सुखे भूसे के साथ 20 से 25 किलो हरे चारे की जरूरत पड़ती है दाने की तो यहां पर बात ही छोड़िए।
पशुपालक रामहेत पाठक का कहना कंबाइन मशीन से गेहूं और धान की फसल की कटाई से पशुओं के लिए चारा की समस्या खड़ी हुई है।पशुपालक कल्लू मिश्रा का कहना है कि गेहूं और धान की खेती पिछली बार कम क्षेत्रफल में हुई थी लोगों ने गन्ना की फसल की बुवाई अधिक की जिसकी वजह से चारे की समस्या खड़ी हुई।पशुपालक ओम प्रकाश पाठक भूसे की किल्लत के पीछे कंपाइन मशीन से गेहूं की फसल की कटाई को प्रमुख कारण बताते हैं।पशुपालक प्रमोद मिश्रा का कहना है कि पहले लोग खरीफ की फसल में जानवरों के चारे के लिए बाजरे की बुवाई करते थे लेकिन अब ऐसा नहीं है जिसकी वजह से हम लो इस समय चारे की समस्या से जूझ रहे हैं।

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