हरदोई।मानव उत्थान सेवा समिति श्री हंस योग आश्रम हरदोई की शाखा अतरौली के लालपुर मे बुधवार शाम को महात्मा सुदासानन्द ने कहा किसत्संग करने से हमारे जीवन में विवेक की जागृति होती है विवेक का मतलब हम बुद्धि ही समझ सकते हैं। सत्संग हमें इस बात से अवगत कराता है कि हमें क्या करना है और क्या नहीं। सत्संग के द्वारा हम निर्णय ले पाते हैं और निर्णय का लेना ही चिंता को मिटाता है, जो हमारे जीवन में हमें मार्गदर्शन देता है,जिससे हमें खुशियां मिलती है। सत्य की शरणागति, सत्य की दोस्ती ,हमें जीवन में खुशियों का अनुभव कराती है। सत्संग से हम असत्य को जानकर उससे तुरंत अपना संबंध हटा पातेहैं।सत्संग के दौरान हम जिस व्यक्ति या गुरु को पसंद करते हैं हम उसके संग अधिक रहते हैं।उसके संग से हमारे जीवन में उसके संग का रंग चढ़ता है जिससे हमारे जीवन में उस व्यक्ति की आदत ,उसके कहे विचार ,उसकी बातों को हम महत्व देने लगते हैं, उसे अपने जीवन में उतारने लगते हैं और यही सत्संग है ,संग ही सत्संग है।सत्संग से सही चिंतन के द्वारा नए तरह का रसायन का हमारे मन मस्तिष्क में निर्माण होता है,जिसका हमारे व्यक्तित्व पर सीधा प्रभाव पड़ता है ।सत्संग से हमें तत्काल सही मार्गदर्शन मिलता है जो हमारे जीवन में खुशियां लाता है ।सत्संग से तत्काल ही दुख का नाश होता है और हम अपने जीवन में उत्साह और ऊर्जा से भरने लग जाते हैं। हमारी चाहत बदलने लगती है ,हमारे में सरलता आती है, हमारे में सहनशक्ति बढ़ती है, और जीवन में खुश रहने की कई कलाएं हमें सीखने को मिलती है।महात्मा शालिनी बाई ने कहा किसत्संग के प्रभाव से अपने निर्णय को हम ठीक ठीक ले पाते हैं, जो हमारे जीवन में खुशियां और आनंद लाती हैं। सत्संग से जीवन में पवित्र चिंतन होने लगता है, हमारा आचरण और व्यवहार का शुद्धिकरण होने लगता है, जो हमारे जीवन में खुशियां बढ़ाता है।सत्संग से हमें सुमति की प्राप्ति होती है जो हमारे विचारों को सकारात्मक बनाने में सक्षम होती है,हमारे जीवन में खुशियां भर्ती है।इस मौके पर शिवम गुप्ता,अंकित अवस्थी, बच्चूलाल त्रिपाठी, राम सहाय,बिहारीलाल,रामदीन आदि लोग मौजूद रहे।















